Monday, September 28, 2009

इंतज़ार

इंतज़ार , एक अल्पविराम...

एक ऐसी खामोशी

जो कानों में एक अदम्य शोर भर दे ,

एक ऐसा शोर जो पागलपन की ओर धकेले।

सुबह जागती हूँ , तो थकी हुई...

थकी .... इस इंतज़ार से ...

थकी , यह जानकर कि लोग

दौडे जा रहे हैं मंजिल कि ओर ....

पर मेरे पैर बंधे हुए हैं

और मैं छुडा भी नही सकती

बस करना मुझे उस क्षण का इंतज़ार

जब मुझे दौड़ना है ।

शायद यह दौड़ बहुत लम्बी है ...

और आधे रस्ते लोग थक जाएँगे...

और तब मेरा वक्त होगा ...

वो मेरी दौड़ होगी ...

तब तक...

बस इंतज़ार...


©Manashi Pathak

Wednesday, September 9, 2009

The Will To Win

The hours tick away...
Day turns to night
and night to day...

Burning in my soul
There is a goal...
inching towards it
one day i'll make it.

At sea, I feel...
So Lost sometimes...
But I have faith
I can brave
The gravest Tempest

I close my eyes
a sweet unrest
Inside,still resides...

The treks,
The averted shipwrecks
are glorious than the Zenith Climbed
Or the Shore arrived...

Drawing strength from every hurdle
Overcoming , overpowering
Limitations without and within
I march ahead
To claim my Win.

© Manashi Pathak